अंखियो के झरोखों से

अंखियो के झरोखों से 
 
पलकों तक जाना है..

सपनों  के रस्ते से..

अब दिल में समाना है..

१. तुझे जबसे देखा है

तुझे जब से जाना है..

बस सोचा यही मन में..

तुझे अपना बनाना है..

अंखियो के झरोखों से..

२. जब सामने तू आता है..

दिल का ये फ़साना है..

धड़कन ही गुम सी है..

पर जिंदा दीवाना है..

अंखियो के झरोखों से

पलकों तक जाना है..

सपनों  के रस्ते से..

अब दिल में समाना है..

(अनुष्का सूरी )

दिल की उमंगो को पतंगों सा उड़ने दो

दिल की उमंगो को पतंगों सा उड़ने दो
 
हाथों के छालों को मौजों से सँभालने दो

जहाँ ले चले मन बांवरा, बहते जाओ तुम

जहाँ मिले मन का तारा, उड़ चलो उस आस्मां में

छोटी से अंखियो में, ख्वाबों को पलने दो

बहके हुए क़दमों को खुद से सँभालने दो

१. चार दिन की है ये जिंदगानी

कभी गरम रेत, तो कभी ठंडा पानी

आग के शोलों को, बर्फ सा पिघलने दो

दिल की तरंगों को थोड़ा  मचलने दो

दिल की उमंगो को पतंगों सा उड़ने दो

२.  कभी दूर से पुकारो, कभी पास आके मुस्कुराओ

होठो की हँसी को, दाँतों  तले मत दबाओ

दिल की बातों को, दिल से यूं  करलो  कि

दिल में है क्या दिल से, दिल को समझने दो

दिल की उमंगो को पतंगों सा उड़ने दो

(अनुष्का )

मैं शायर तो नहीं-हिंदी कविता

मैं शायर तो नहीं
पर दिल शायराना चाहता है
तू कातिल तो नहीं
मैं तेरी नजरो से घायल हूँ कहीं
तू ही मौला तू ही जूनून है
तेरे पास आके  ही मिलता सुकून है
तू बोले तो जियें 
जो बोले जो सर क़त्ल किये 
जो जागे तो है सवेरा 
तू न दिखे तो रहे अँधेरा 
तुझसे ही हर सुबह 
तुझसे ही हर शाम है
इन होठो पर खुदा से भी पहले
बस तेरा ही नाम है
यु तो क़त्ल हुए लाखो तेरे दीदार भर से
पर तुझपर मरने वालो में अपना भी कुछ नाम है
(अनुष्का सूरी)

Bura na mano Holi hai – Hindi Poem

बुरा न मानो होली है – हिंदी कविता

रंगों के संग, मस्ती की टोली है

बुरा न मानो होली है

उम्मीदों की मिठाई है

खुशियों संग मिलाई  है

उल्लास में डूबे है सभी

मस्ती हर दिल पर छाई है

कोई नीला है, कोई है हरा

चारो तरफ इन्द्रधनुष सा रंग भरा

खुश हम भी है, हर्ष की बात है

अपनों के संग हर होली खास है

 (अनुष्का  सूरी )
आप सभी को होली की शुभकामनाएं!

Hindi Love Poem : Aksar socha karte hai

रातो को  तन्हाई में, अक्सर सोचा करते हैं

क्या खास है पाया तुम में, तुम पर क्यों हम मरते हैं?

सवाल ये हमने किया खुद से जब, एक बार न सों बार किया

जवाब कभी न आया जुदा  सा, हर बार एक इज़हार किया

तुम को पाकर हम हुए धनवान, तुमको खो कर हुए गरीब

कोशिश बहुत की हमने, पर बदल  न पाए अपने नसीब

फिर भी दिल में एक आस है, तेरे पास होने का एहसास है

दूर तू नजरो से हो मगर, दिल के हर दम पास है

आजा अब लौट के आजा, तेरे बिना मन उदास है

जल्दी  आजा, दौड़  के आजा, ना जाने कब तक इन साँसों में सांस है

(लेखिका : अनुष्का सूरी )

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Tujhe paane ki tamanna- Love Poem

तुझे पाने की तमन्ना कल भी थी

तुझे पाने की आरज़ू आज भी है

ज़माने की परवाह कल भी न थी

ज़माने का डर आज भी न है

तुझसे मिल के भी न मिल सकी मैं

इस ग़म का दिल में ज़ख्म है बन गया

जो मैं मर भी जाऊ अगर

खुदाया तुझे न भूल पाउ मैं

खुश रहे तू जहा भी रहे

मिल जाये तुझको हर ख़ुशी

तेरे साथ न रह सके तो क्या गिला

ख़ुशी इसी में है कि हम मिले थे कभी

(लेखिका : अनुष्का सूरी )

Tu dil mein rehta hai – love poem

तू दिल में रहता है

आँखों में पानी सा बहता है

कानो में घुंगरू सा बजता है

नींद में सपने सा लगता है

रेगिस्तान में प्यास सा

दुःख में आस सा

दिल में दर्द बनके रहता है

बातों में मिठास बनके कहता है

दिल तुझे रोज़ ढूंडा करता है

दिल तुझे रोज़ माँगा करता है

काश मुझे मिल जाता तू कभी

ये सिसक अज भी है मन में

क्या तू मेरा हो पायेगा कभी

ये आशा अज भी है मन में

यु तो तुझसे बात हम नहीं किया करते

पर तुझे नहीं पता कितना यद् तुझे करते है

कभी हमारा एक होना हो पाए जो मुमकिन

तो हमको आके  बताना बेझिझक

तेरी राह में हम तब भी

शायद आंसू बहाया करते होंगे

(लेखिका : अनुष्का सूरी )