Main hoon ek ped – Hindi Poem

मैं हूँ एक पेड़ खड़ा बीच सड़क
सुनाऊँ क्या अपनी भी मैं कुछ दास्तान Image
चारों तरफ मेरे हैं चलती गाड़ी
और सर पर है एक खुला आसमान
आता है पतझड़ या हो छाई बसंत
मेरे यहाँ खड़े रहने का नहीं कोई अंत
कितने सावन देखे मैंने कितनी  देखी फुआर
कितनी गर्मी झेली मैंने कितनी सर्दी भरमार
फिर भी मैं रहता हूँ यहाँ खड़ा अकेला
चरों तरफ मेरे है लोगों का मेला

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