मैं शायर तो नहीं-हिंदी कविता

मैं शायर तो नहीं
पर दिल शायराना चाहता है
तू कातिल तो नहीं
मैं तेरी नजरो से घायल हूँ कहीं
तू ही मौला तू ही जूनून है
तेरे पास आके  ही मिलता सुकून है
तू बोले तो जियें 
जो बोले जो सर क़त्ल किये 
जो जागे तो है सवेरा 
तू न दिखे तो रहे अँधेरा 
तुझसे ही हर सुबह 
तुझसे ही हर शाम है
इन होठो पर खुदा से भी पहले
बस तेरा ही नाम है
यु तो क़त्ल हुए लाखो तेरे दीदार भर से
पर तुझपर मरने वालो में अपना भी कुछ नाम है
(अनुष्का सूरी)
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7 thoughts on “मैं शायर तो नहीं-हिंदी कविता

  1. Hello,
    Anushka ji. . . .
    Apki shayariya bahut achi hai, mujhe bahut achi lagti hai, wese me bhi likhta hu, par ap bahut achi likhti ho. . . .

  2. Pingback: 2010 in review « Anushka Suri's Blog

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